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तुम ही हो मेरा सपना




(अंतरा 1) तुम ही हो मेरा सपना, तुम ही हो मेरा जहां, तेरे बिना ये दिल, कहीं भी लगता नहीं है। तेरी हंसी की मिठास, जैसे शहद की मिठास, तेरे बिना ये दुनिया, अब मुझे भाती नहीं है।

(रिफ्रेन) तेरे बिना, तेरे बिना, जीना मुझे आता नहीं है। तेरे बिना, तेरे बिना, दिल मेरा बहलता नहीं है।


(अंतरा 2) तेरे बिना ये रातें, चांदनी सी सुनी-सुनी, तेरे बिना ये दिन, धूप भी जैसे धुंधली। तेरे साथ हर पल, लगता है जैसे जन्नत, तेरे बिना ये दुनिया, लगती है जैसे वीरान।

(रिफ्रेन) तेरे बिना, तेरे बिना, जीना मुझे आता नहीं है। तेरे बिना, तेरे बिना, दिल मेरा बहलता नहीं है।

(अंतरा 3) तेरी आंखों में खो जाना, मेरी आदत बन गई, तेरी बातों में ढूंढना, मेरी हसरत बन गई। तेरी सांसों की खुशबू, मेरे दिल में बस गई, तेरी यादों की चादर, मेरी रातें सजा गई।

(रिफ्रेन) तेरे बिना, तेरे बिना, जीना मुझे आता नहीं है। तेरे बिना, तेरे बिना, दिल मेरा बहलता नहीं है।

(अंतरा 4) तुम्हारे बिना हर ख्वाब, अधूरा सा लगता है, तुम्हारे बिना हर पल, बेगाना सा लगता है। तेरे बिना ये धड़कन, जैसे बेजान सी हो, तेरे बिना ये जीवन, जैसे वीरान सी हो।

(रिफ्रेन) तेरे बिना, तेरे बिना, जीना मुझे आता नहीं है। तेरे बिना, तेरे बिना, दिल मेरा बहलता नहीं है।

(अंतरा 5) तुम्हारे साथ हर लम्हा, यादों में बस जाता है, तुम्हारे बिना हर दिन, तन्हा सा रह जाता है। तेरे साथ जीना, जैसे सपना हो सच्चा, तेरे बिना ये जीवन, लगता है अधूरा सा।

(रिफ्रेन) तेरे बिना, तेरे बिना, जीना मुझे आता नहीं है। तेरे बिना, तेरे बिना, दिल मेरा बहलता नहीं है।

(समाप्ति) तुम ही हो मेरा सपना, तुम ही हो मेरा जहां, तेरे बिना ये दिल, कहीं भी लगता नहीं है।

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